वेदना में दृष्टि है... अज्ञेय जी ने भी कहा है- दुःख इन्सान को मांजता है... सच कहूं तो इस कटु सत्य क़ि अनुभूति मुझे अब हुई है॥ पिछले कुछ महीनो में जो कुछ मेरे साथ हुआ वो किसी मजाक से कम नहीं था..मजाक भी उस हद तक क़ि मेरी जान ही जाने वाली थी..जान गई तो नहीं पर जाते जाते बची..अब जबकि हादसे से उबार चूका हूँ अपने में बड़ा बदलाव देख रहा हूँ..जो सबलता ३० सालों में नहीं पा सका ओ महज़ ३-४ महीनो में पा गया.. जो आत्मविश्वास अब जगा है वैसा पहले कभी नहीं था..यूं कहिये में जवान हो गया, पहले नादाँ था....पहले हर किसी पर भरोसा कर लेता था..अब शायद अपनों पर भी न कर सकूं..क्योंकि ये जख्म अपनों ने दिए है..पर अपना कहना ठीक नहीं होगा..जिसे में अपना समझ बैठा था ओ शायद कभी मेराथा ही नहीं..सच तो ये है क़ि ओ किसी की भी नहीं है... खुद की भी नहीं...उसकी जिंदगी उसे मुबारक..मुझे अफ़सोस रहेगा तो केवल इस बात का क़ि दुनिया क़ि बातो को नज़रंदाज़ कर सब जानते हुआ भी एक भटके इन्सान का साथ देना चाहा..ज़माने से लड़ने का तैयार था..पर उसे रास्ते पर नहीं ला सका.हां इस कोशिश में मेरी सबसे प्यारी चीज़ चली गयी जिसे में ३० -३१ सालों तक हवास की मारी दुनिया से बचा कर रखा था...नादाँ था. अनारी था॥ मेरे अनारीपन को मेरी कमजोरी समझा गया..खैर होनी को कौन ताल सकता है...संतोष इतना ही है की मेरे इरादे नेक थे..इमानदार कोशिश में बहुमूल्य चीजे खोयी ......
अगर में सही हूँ तो मुझे लगता है जो हुआ मेरे लिए सही हुआ॥ बल्कि और पहले होता तो ठीक होता ...दुनिया जानने के लिए ठेस लगाना ज़रूरी है॥ आज में गज़ब का आत्मविश्वास महसूस कर रहा हूँ... कुंदन हो कर निकला हूँ..
mere देर से जागने की वजह है ॥ घर से कभी कोई आर्थिक दबाव नहीं रहा। सर पर कोई ज़िम्मेदारी नहीं रही..दुनियादारी की चिंता हुई नहीं॥ ज़िन्दगी अपनी तरह से जीता रहा॥ सो वेदना हुई नहीं तो दृष्टि मिली नहीं॥ में ऐसा था जैसे गंगोत्री की गंगा॥ पता ही नहीं चला की गंगा बनारस में भी है..जहा डूबकी लगते भी दर लगता है... विडंबना देखिये रहा बनारस में पर ज्ञान की गंगा मिली दिल्ली में जहा गंगा है ही नहीं... है भी तो यमुना मैला-कुचैला... देर से ही सही सवेरा हुआ॥
अब दुनिया को बेहतर समझने लगा हूँ॥ में गिरा हूँ पर हारा नहीं हूँ... दुनिया मेरे लिए अब भी खूबसूरत है...किसी का साथ देने केलिए अब भी कदम उठेंगे...पर संभलकर॥ सच ही दुःख इन्सान को मांजता है। कुंदन बनाता है ... में भी बना हूँ... आज बस इतना ही....
Sunday, December 27, 2009
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z
ReplyDeletegood work
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jindagi ne apko gale lagaya hai... sanyasi kya jane is dard ko woh toh sirf paribhasa(Theory) hi de sakte hain... Jeevan ke is safar mein bahut parao aane wale hain usmein se kuchh achhe toh kuchh bure anubhav de jayenge.. anand apka swabhav hai ... hira ko jauhari hi pehchanta hai lohar kya jane uska mole isliye agar lohar hira kinare kar de bemol samajh ke toh ashcharya nahi kijiye hire par bulki us lohar ki nadani par karuna bhao rakiaye....
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